Thursday, February 25, 2010

सचिन तेंदुलकर नहीं ''देवेन्द्र सिंह'' देश का हीरो है

सितम्बर २००७ युवराज सिंह ने छे बोल पर छे सिक्स मार दिए युवराज सिंह पर तोहफों की बोछार हुयी ! लगभग दस करोड़ के इनाम उस युवराज को दिए गए जो नाम का भी युवराज है और पैसो में भी मालामाल था ! अब फरवरी २०१० सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए २०० रन बना दिए इनामो की कमी सचिन को भी नहीं रही जबकि सचिन पिछले २० वर्षो से रुपयों में ही खेल रहे है जिस दिन युवराज ने सिक्स बोल पर छे सिक्स उसी दिन दो सिपाही देश की रक्षा के कारन कश्मीर में आतंकियों से लड़ते शहीद हो गए आज २०१० आने पर भी शायद उनके परिवार वालो को मिलने वाले पैसो की खातिर अपनी कितनी चप्पले घिसनी पड़ी होंगी आप अंदाजा लगा सकते है आज २४ फरवरी २०१० को कश्मीर के सोपोर में देवेन्द्र सिंह नाम का आर्मी में छे आतंकियों को अपनी गोली का शिकार बना कर शहीद हो गया बदकिस्मती से वो एक गोली देवेन्द्र सिंह को लगी नहीं तो देवेन्द्र सिंह भी ६०० रनों पर नोट आउट होकर ही कश्मीर की पिच से लोटता (एक आतंकी कम से कम १०० नागरिको को निशाना बनता ) बदकिस्मती देवेन्द्र सिंह की नहीं इस देश की है जन्हा देश को प्यार करने वाले और देश पर जान देने वाले देवेन्द्र सिंह जैसे सपूत पैदा होते है और मुल्क के युवाओ को नेताओ को अफसरों को मिडिया को व्यापारियों को देवेन्द्र सिंह के मोर्चे से ज्यादा सचिन की चिंता होती है क्या होगा इस देश का जन्हा सब पागलो जैसी हरकते कर रहे है सीमा पर जवान की कोई कीमत नहीं और चारदीवारी के अन्दर खेलते सचिन की कीमत करोडो में सीमा पर शहीदों की कोई पर्शंसा नहीं और चारदीवारी में खेलते क्रिकेटरों की पर्शंसा में हमारे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भी बधाई देते है देश का सामान्य युवा पागलो की तरह मसेज करने लग गया पता नहीं क्या गुल खिल गया जैसे पाकिस्तान पर युद्ध में जित हासिल कर ली हो, काश सचिन के रनों पर बह्दायी के लिए दिए गए मसेज से कमाई का आधा हिस्सा भी मेरे युवा साथी शहीद देवेन्द्र सिंह के परिवार वालो को देते तो मेरे युवा भारत का सर गर्व से उठता मुझे नहीं लगता सचिन ने कोई बड़ा काम या अनोखा काम कर दिया क्रिकेट २० साल से खेल रहा है इसी क्रिकेट ने उसको सभी सुविधाए दी अगर अपने अनुभव से २०० रन मारे तो अच्छा हुवा परन्तु इस पर इतना शोर मचने की जरुरत नहीं थी जितना मचाया गया वैसे इस काम में सचिन भी नर्दोश है उसकी कोई गलती भी नहीं कह सकता हु जित के बाद इंटरव्यू में सचिन ने तो बड़े साधारण तरीके से ही अपनी बात कही गलती तो देश के मिडिया की है जो युवाओ को खेल के पीछे इतना पागल कर दिया के वो सब कुछ भूल जाते है मुझे दुःख इस बात का अधिक है के ये जित का जश्न उस दिन मनाया ज रहा था जिस दिन पंजाब में एक शहीद के परिवार वाले उसके पार्थिव शारीर का इंतजार कर रहे हते जरा सोच कर देखो आपको पता चल जायेगा के भारत माँ की रक्षा के लिए कम लोग ही सेना में भारती होने क्यों जाते है पर देवेन्द्र सिंह सच्चा देश भक्त था उसने देश की रक्षा करने की कसम खायी थी नहीं तो ऍम बी सबको सबको हुवा कंही भी नोकरी पा सकता था काश जितने लोगो ने क्रिकेट पर नजर गदा कर सचिन की पारी देखि अगर उससे आधी चिंता भी सीमा पर देश लगा लेता तो एक सिपाही शहीद होने से बच सकता था !

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