Saturday, April 3, 2010

सानिया मिर्ज़ा - हिंदुस्तान को इस्तमाल किया

२००२ देश में क्रिकेट स्टार को भुलाकर एक और खेल के उभरते सितारे को भारत के युवाओ ने हाथो हाथ लिया वो खेल था टेनिस और स्टार थी सानिया मिर्ज़ा ऐसा लगा मनो पुरे देश ने मंदिर, मस्जिद ,गुरद्वारो ,गिरजाघर, में जाकर सानिया के लिए पूजा , नमाज ,अरदास, प्रेयर, की हो मनो सारा देश और देश के सभी अलग-अलग धर्मो के लोगो की बेटी जैसी हो गयी सानिया मिर्जा इस प्रार्थना के बल पर सानिया
ने कितनी पर्तियोगिताये जीती ये सभी जानते है क्या ऐशो -आराम सुख -सुविधा मान -सम्मान मिला ये भी सब जानते ही है और देखते ही देखते सानिया का नाम कितने ही क्रिकेट के सितारों युवराज सिंह या धोनी से जुड़ने लगा देश की मिडिया ने कई बार इनके किस्से अखबार और चैनलों पर आते रहे मै सच कहू तो पूरा देश उसको भारत के इन्ही में से किसी के साथ शादी के बंधन में बंधे देखना चाहता था या कहू की निकाह देखना चाहता था नाम कुछ भी दो जीवन साथी देखना चाहता था (जीवन साथी शब्द निकाह के लिए शायद नहीं है क्योंकि वंहा और भी विकल्प होते है )परन्तु वो सब हो न सका फिर एक दिन बात आई की शहीद कपूर भी है गिनती में और उसके बाद एक धमाका हुआ एक नाम आया वो न फिल्म कलाकार था न क्रिकेटर वो नाम था सानिया मिर्ज़ा का बचपन का प्यार सोहराब हैदराबाद का ही रहने वाला सोहराब और सानिया बचपन से ही एक दुसरे को चाहते थे और दुसरे ही पल खबर आई की कहानी ख़त्म सगाई टूट गयी है
२ अप्रैल २०१० को एक नाम सामने आया सोहैब मालिक जो पाकिस्तानी क्रिकेट पलेयर है शुरू में तो पिछली कहानियो को देखते सभी को लगा ये भी एक किस्सा ही होगा पर सानिया के मिडिया के सामने कबूलने पर पूरा देश भोचक्का है की क्या हो गया है इसे भोचक्का इस लिए नहीं की सोहैब से पहले निकाह करने का दावा आयशा सिद्दकी ने किया जिस धरम से वे है वंहा ये मामूली बात है देश की जनता जो हिन्दू मुसलमान नहीं सिर्फ देश की जनता है इस मुद्दे पर सभी परेशान है सोच रहे है खाया पिया कुछ नहीं गिलास तोडा बारा -आना सब दिया इस देश की जनता ने सरकार ने जन्म लिया इस देश की धरती पर और चली पाकिस्तान अरे गलती माफ़ करना वो तो पाकिस्तान भी नहीं दुबई जा रही है जन्हा सारे आतंकी छिपे है जिनकी आज तक तलाश है भारत को
एक बात साफ़ हो गयी है न तो सानिया अच्छी नागरिक साबित हुयी और ना अच्छी प्रेमिका
कहते है की कोई काम जिसमे आपका बुरा छिपा है और आपके घर वालो का भला तो वो काम घर वालो की भलाई के लिए कर लेना चाहिए और अगर आपका शहर उजड़ने से आपके देश की तरक्की होती है तो अपने शहर को देश की तरक्की के लिए उजाड़ देना ही अच्छा होता है इसे ही अपने देश और घर के प्रति सच्चा समर्पण कहते है पर सानिया तो ना देश के प्रति कोई भावना रखती है ना देश के लोगो के प्रति
जिस देश में वो जा रही है maano यदि जन्म भी वन्ही लिया होता तो क्या वो मिन्नी स्कर्ट पहन कर टेनिस खेल पाती स्टार बन पाती इतनी बड़ी नहीं कभी नहीं पाकिस्तानी ही उसे ख़त्म कर देते या उनके धर्म bhai तालिबानी ख़त्म कर देते उसकी तो कहानी शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाती असल में दोनों की ही कहानी ऐसी ही है कोई भी अपने देश के प्रति सम्मान नहीं रखता अगर सोहेब को पाक से प्यार होता तो पाक से ही कोई निकाह कर लेता कम से कम निकाह के बाद रहता तो पाकिस्तान में वो तो वह भी नहीं कर रहा है मुझे एक कहावत याद आ गयी ''राम मिलाये जोड़ी एक अँधा एक कोढ़ी '' ये इन पर ठीक है
दोनों के मुह पर एक जवाब है की हमें एक दुसरे से प्यार है मित्रो जो अपने देश से प्यार नहीं करता वो किसी दुसरे मुल्क वाले से कैसे प्यार कर सकता है हाँ शारीरिक सुख और वैश्विक पर्शंसा के लिए तो कुछ भी किया ज सकता है क्योंकि लोक पर्शंसा के लिए तो लोग सन्यास भी ले लेते है
और फिर सानिया कोई सिर्फ लड़की नहीं है की प्यार किया और फुर्र वो हिंदुस्तान की प्रोपर्टी है उसे हिंदुस्तान ने बनाया है ये वो कैसे भूल गयी शायद माँ बाप ने सिखाया ही नहीं वे भी बचपन से पाकिस्तान का ही गुणगान करते रहे होंगे पर इस देश में रहने वाले सभी मुस्लमान एक जैसे नहीं
देश को मेरे कुछ सुझाव है अगर सानिया ऐसा कर सकती है तो देश को भी कुछ कदम उठाने की जरुरत है क्योंकि अधिकतर मुस्लिम जो कुछ सफलता हासिल कर लेते है वो कुछ ज्यादा ही देश को निचा dikhaana शुरू करते है चाहे वो शारुख खान(जिसने अपनी डब्बा फिल्म अपने विवादित वाक्य से हित करायी) हो या मकबूल फ़िदा हुसियन (जिसे हिन्दुस्तानी देवी देवताओ में भी सेक्स दीखता है ) और अब सानिया की बारी थी .........
सुझाव .........१)देश नियम बनाये जो ऐसे करे उसे पाकिस्तान में ही भेज दिया जाये
२)ऐसे लोगो को संधिग्ध श्रेणी में रखा जाये
३)देश से मिलने वाली सुविधाओ को ख़त्म किया जाये
शयद मुश्किल काम है पर ऐसे लोगो को सबक सिखाने के लिए करना चाहिए जो पैदा हो भारत में खाए भारत का पहने भारत का सम्मान मिले भारत में और गुणगान पाक का ये हमें मंजूर नहीं अगर सच्चे देश भक्त हो जाती धर्म चाहे जो हो तो क्रप्या इस विचार को सभी साथियो तक पहुचना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है जय भारत

Thursday, February 25, 2010

सचिन तेंदुलकर नहीं ''देवेन्द्र सिंह'' देश का हीरो है

सितम्बर २००७ युवराज सिंह ने छे बोल पर छे सिक्स मार दिए युवराज सिंह पर तोहफों की बोछार हुयी ! लगभग दस करोड़ के इनाम उस युवराज को दिए गए जो नाम का भी युवराज है और पैसो में भी मालामाल था ! अब फरवरी २०१० सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए २०० रन बना दिए इनामो की कमी सचिन को भी नहीं रही जबकि सचिन पिछले २० वर्षो से रुपयों में ही खेल रहे है जिस दिन युवराज ने सिक्स बोल पर छे सिक्स उसी दिन दो सिपाही देश की रक्षा के कारन कश्मीर में आतंकियों से लड़ते शहीद हो गए आज २०१० आने पर भी शायद उनके परिवार वालो को मिलने वाले पैसो की खातिर अपनी कितनी चप्पले घिसनी पड़ी होंगी आप अंदाजा लगा सकते है आज २४ फरवरी २०१० को कश्मीर के सोपोर में देवेन्द्र सिंह नाम का आर्मी में छे आतंकियों को अपनी गोली का शिकार बना कर शहीद हो गया बदकिस्मती से वो एक गोली देवेन्द्र सिंह को लगी नहीं तो देवेन्द्र सिंह भी ६०० रनों पर नोट आउट होकर ही कश्मीर की पिच से लोटता (एक आतंकी कम से कम १०० नागरिको को निशाना बनता ) बदकिस्मती देवेन्द्र सिंह की नहीं इस देश की है जन्हा देश को प्यार करने वाले और देश पर जान देने वाले देवेन्द्र सिंह जैसे सपूत पैदा होते है और मुल्क के युवाओ को नेताओ को अफसरों को मिडिया को व्यापारियों को देवेन्द्र सिंह के मोर्चे से ज्यादा सचिन की चिंता होती है क्या होगा इस देश का जन्हा सब पागलो जैसी हरकते कर रहे है सीमा पर जवान की कोई कीमत नहीं और चारदीवारी के अन्दर खेलते सचिन की कीमत करोडो में सीमा पर शहीदों की कोई पर्शंसा नहीं और चारदीवारी में खेलते क्रिकेटरों की पर्शंसा में हमारे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भी बधाई देते है देश का सामान्य युवा पागलो की तरह मसेज करने लग गया पता नहीं क्या गुल खिल गया जैसे पाकिस्तान पर युद्ध में जित हासिल कर ली हो, काश सचिन के रनों पर बह्दायी के लिए दिए गए मसेज से कमाई का आधा हिस्सा भी मेरे युवा साथी शहीद देवेन्द्र सिंह के परिवार वालो को देते तो मेरे युवा भारत का सर गर्व से उठता मुझे नहीं लगता सचिन ने कोई बड़ा काम या अनोखा काम कर दिया क्रिकेट २० साल से खेल रहा है इसी क्रिकेट ने उसको सभी सुविधाए दी अगर अपने अनुभव से २०० रन मारे तो अच्छा हुवा परन्तु इस पर इतना शोर मचने की जरुरत नहीं थी जितना मचाया गया वैसे इस काम में सचिन भी नर्दोश है उसकी कोई गलती भी नहीं कह सकता हु जित के बाद इंटरव्यू में सचिन ने तो बड़े साधारण तरीके से ही अपनी बात कही गलती तो देश के मिडिया की है जो युवाओ को खेल के पीछे इतना पागल कर दिया के वो सब कुछ भूल जाते है मुझे दुःख इस बात का अधिक है के ये जित का जश्न उस दिन मनाया ज रहा था जिस दिन पंजाब में एक शहीद के परिवार वाले उसके पार्थिव शारीर का इंतजार कर रहे हते जरा सोच कर देखो आपको पता चल जायेगा के भारत माँ की रक्षा के लिए कम लोग ही सेना में भारती होने क्यों जाते है पर देवेन्द्र सिंह सच्चा देश भक्त था उसने देश की रक्षा करने की कसम खायी थी नहीं तो ऍम बी सबको सबको हुवा कंही भी नोकरी पा सकता था काश जितने लोगो ने क्रिकेट पर नजर गदा कर सचिन की पारी देखि अगर उससे आधी चिंता भी सीमा पर देश लगा लेता तो एक सिपाही शहीद होने से बच सकता था !